Sharad Purnima 2026: तारीख, चांदनी रात का महत्व और पूजा विधि
शरद पूर्णिमा 2026 रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन आश्विन महीने की पूर्णिमा होती है। चांदनी रात, चंद्र देव की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और खीर को चांदनी में रखने की परंपरा इस पर्व को खास बनाती है।
मुंबई के लिए Drik Panchang के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय लगभग शाम 5:28 बजे होगा। कोजागिरी लक्ष्मी पूजा का निशीथ समय रात 11:58 बजे से 26 अक्टूबर को मध्यरात्रि के बाद 12:47 बजे तक बताया गया है। शहर और पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
इस लेख में आप शरद पूर्णिमा की तारीख, चांदनी रात का धार्मिक महत्व, पूजा की सरल विधि, खीर रखने की परंपरा और इस दिन से जुड़े आम सवालों के जवाब जानेंगे।
Sharad Purnima 2026: तारीख और समय
| विवरण | तारीख / समय |
|---|---|
| शरद पूर्णिमा | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 |
| पूर्णिमा तिथि शुरू (मुंबई) | 25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त (मुंबई) | 26 अक्टूबर, सुबह 9:41 बजे |
| चंद्रोदय (मुंबई) | 25 अक्टूबर, शाम लगभग 5:28 बजे |
| कोजागिरी लक्ष्मी पूजा का निशीथ समय (मुंबई) | रात 11:58 बजे से 26 अक्टूबर, मध्यरात्रि के बाद 12:47 बजे तक |
ध्यान दें: पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी, लेकिन मुख्य चांदनी रात और शरद पूर्णिमा से जुड़ी पूजा 25 अक्टूबर की शाम और रात को की जाएगी। पूजा का सटीक मुहूर्त स्थानीय पंचांग से मिलाना बेहतर है।
शरद पूर्णिमा क्या है?
शरद पूर्णिमा हिंदू पंचांग के आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है। शुक्ल पक्ष का मतलब अमावस्या के बाद चंद्रमा के बढ़ने वाला पखवाड़ा है। इस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है, इसलिए इसे पूर्णिमा कहा जाता है।
महाराष्ट्र में इस पर्व को कोजागिरी पूर्णिमा कहा जाता है। भारत के कुछ अन्य क्षेत्रों में इसके मिलते-जुलते नाम कोजागरी या कोजागरा पूर्णिमा हैं, जबकि गुजरात में यह शरद पूनम के नाम से प्रचलित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा और प्रसाद की परंपराएं बदल सकती हैं।
रास पूर्णिमा और सोलह कलाओं की मान्यता
ब्रज क्षेत्र में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी चांदनी रात में श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। एक अन्य पारंपरिक मान्यता में चंद्रमा को इस रात सोलह कलाओं से पूर्ण माना जाता है। ये धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक दावे नहीं।
शरद पूर्णिमा की चांदनी रात का महत्व
1. चंद्र देव की पूजा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा करना शुभ माना जाता है। भक्त चंद्र देव को जल अर्पित करते हैं और सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। कुछ परिवार चांद को अर्घ्य देते हैं, यानी जल चढ़ाते हैं।
2. मां लक्ष्मी की आराधना
कई क्षेत्रों में इस रात मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कोजागिरी परंपरा में रात को जागकर पूजा करने का विशेष महत्व है। “कोजागिरी” नाम को “कौन जाग रहा है?” वाली धार्मिक कथा से जोड़ा जाता है। यह मान्यता है कि जागकर पूजा करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है।
3. चांदनी में खीर रखने की परंपरा
शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखने और बाद में प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत जैसा गुण माना जाता है। यह एक पारंपरिक आस्था है, इसे किसी बीमारी के इलाज या वैज्ञानिक रूप से साबित स्वास्थ्य लाभ के रूप में नहीं बताना चाहिए।
4. परिवार के साथ पूजा और प्रसाद
इस पर्व पर परिवार के लोग साथ बैठकर पूजा करते हैं, भजन गाते हैं और प्रसाद बांटते हैं। कई घरों में व्रत रखा जाता है, जबकि कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार सामान्य पूजा करते हैं।
शरद पूर्णिमा 2026 की पूजा विधि
पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार बदल सकती है। घर पर सरल तरीके से पूजा करने के लिए ये steps अपनाए जा सकते हैं:
पूजा से पहले तैयारी करें
- पूजा की जगह साफ करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं।
- चंद्र देव या मां लक्ष्मी की तस्वीर अथवा प्रतिमा रखें, जिस देवता की पूजा आपके घर में होती है।
- दीपक, फूल, अक्षत यानी साबुत चावल, फल, मिठाई और जल तैयार रखें।
- प्रसाद के लिए खीर या दूध की तैयारी करें।
शाम और चंद्रोदय के समय
- स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह पर दीपक जलाएं।
- अपने परिवार की परंपरा के अनुसार चंद्र देव और मां लक्ष्मी का ध्यान करें।
- फूल, फल, जल और प्रसाद श्रद्धा से अर्पित करें।
- चंद्रमा दिखाई देने पर परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें और सुख-शांति की प्रार्थना करें।
रात की पूजा और प्रसाद
- यदि आपके परिवार में कोजागिरी लक्ष्मी पूजा होती है, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करें।
- खीर को चांदनी में रखने की परंपरा निभाएं तो उसे ढककर रखें, ताकि धूल और कीड़े न पड़ें।
- परंपरा निभाते हुए खीर को चांदनी में कुछ घंटे रखने के बाद ढककर फ्रिज में रखें। दूध से बनी खीर को कमरे के तापमान पर लंबे समय तक या पूरी रात बाहर न छोड़ें। खाने से पहले उसकी स्थिति और सुरक्षित रखने का समय ध्यान में रखें।
- परिवार के साथ प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों को भोजन या वस्तुओं का दान अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते हैं।
व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत, उम्र और जरूरत के अनुसार व्रत करें। किसी विशेष नियम को सभी के लिए जरूरी न मानें; अपने घर की परंपरा और योग्य धार्मिक मार्गदर्शन का पालन करें।
शरद पूर्णिमा की पूजा सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| दीपक और घी / तेल | पूजा के समय दीप जलाने के लिए |
| फूल और अक्षत | पूजा में अर्पित करने के लिए |
| जल और पूजा पात्र | अर्घ्य या सामान्य पूजा के लिए |
| फल और मिठाई | भोग और प्रसाद के लिए |
| दूध, चावल और चीनी | खीर बनाने के लिए |
| साफ ढक्कन वाला बर्तन | प्रसाद को ढककर रखने के लिए |
शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों बनाई जाती है?
खीर दूध, चावल और चीनी से बनाई जाती है। कई परिवार इसमें इलायची, केसर या मेवे भी डालते हैं। धार्मिक परंपरा में खीर को चांदनी में रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में बांटने की मान्यता है।
यह जरूरी नहीं कि हर परिवार यही रीति निभाए। कुछ जगहों पर दूध या मसाला दूध का भोग लगाया जाता है। आप अपनी क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखें: दूध से बनी खीर को ढककर रखें और बहुत देर तक बाहर रखने से बचें। यदि खीर गर्म मौसम में कई घंटे बाहर रही हो, तो सिर्फ परंपरा के कारण उसे खाना जरूरी न समझें।
शरद पूर्णिमा और कोजागिरी पूर्णिमा में क्या अंतर है?
कई क्षेत्रों में दोनों नाम एक ही आश्विन पूर्णिमा की रात के लिए इस्तेमाल होते हैं। “शरद पूर्णिमा” नाम उत्तर और मध्य भारत सहित कई हिस्सों में प्रचलित है, जबकि “कोजागिरी” या “कोजागरा” नाम खास तौर पर बंगाल, ओडिशा, असम और महाराष्ट्र की कुछ परंपराओं में सुनने को मिलता है।
पूजा का तरीका क्षेत्र के अनुसार बदल सकता है। कहीं चंद्र देव की पूजा और खीर की परंपरा प्रमुख होती है, तो कहीं मां लक्ष्मी की रात में पूजा और जागरण पर अधिक जोर दिया जाता है।
क्या शरद पूर्णिमा पर व्रत रखना जरूरी है?
नहीं, सभी लोगों के लिए व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। कुछ लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं, कुछ शाम की पूजा करते हैं और कुछ लोग सिर्फ चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रसाद बांटते हैं। अपने परिवार की परंपरा और सेहत के अनुसार फैसला करें।
शरद पूर्णिमा 2026 से जुड़े 8 FAQs
1. शरद पूर्णिमा 2026 कब है?
शरद पूर्णिमा 2026 रविवार, 25 अक्टूबर को है। मुंबई में पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर सुबह 9:41 बजे तक रहेगी।
2. मुंबई में शरद पूर्णिमा 2026 को चांद कितने बजे निकलेगा?
Drik Panchang के अनुसार मुंबई में 25 अक्टूबर को चंद्रोदय लगभग शाम 5:28 बजे है। मौसम और स्थानीय दृश्यता के कारण चांद दिखने का अनुभव अलग हो सकता है।
3. शरद पूर्णिमा पर खीर चांदनी में क्यों रखते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात चंद्रमा की किरणों को अमृत जैसी माना जाता है। इसलिए खीर को चांदनी में रखने की परंपरा है। इसे किसी स्वास्थ्य लाभ की वैज्ञानिक गारंटी नहीं समझना चाहिए।
4. शरद पूर्णिमा पर किसकी पूजा की जाती है?
कई परिवार चंद्र देव की पूजा करते हैं। कोजागिरी परंपरा में मां लक्ष्मी की पूजा और रात में जागरण भी किया जाता है। रीति-रिवाज क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकते हैं।
5. शरद पूर्णिमा और कोजागिरी पूर्णिमा क्या एक ही हैं?
कई क्षेत्रों में दोनों नाम आश्विन महीने की पूर्णिमा की रात के लिए इस्तेमाल होते हैं। अलग-अलग स्थानों पर पूजा की विधि और स्थानीय परंपराएं अलग हो सकती हैं।
6. शरद पूर्णिमा की पूजा का शुभ समय क्या है?
मुंबई के लिए चंद्रोदय लगभग शाम 5:28 बजे और कोजागिरी पूजा का निशीथ समय 25 अक्टूबर रात 11:58 बजे से 26 अक्टूबर मध्यरात्रि के बाद 12:47 बजे तक बताया गया है। समय दूसरे शहरों में अलग हो सकता है।
7. क्या शरद पूर्णिमा पर रात भर जागना जरूरी है?
कुछ कोजागिरी परंपराओं में रात में जागकर पूजा करने का महत्व है, लेकिन सभी परिवारों में यह अनिवार्य नियम नहीं है। अपनी परंपरा और सेहत के अनुसार पूजा करें।
8. शरद पूर्णिमा की खीर अगले दिन खा सकते हैं?
परंपरा में खीर अगले दिन प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। लेकिन दूध से बनी खीर लंबे समय तक बाहर रहने पर खराब हो सकती है। इसे ढककर रखें, सुरक्षित तापमान में रखें और खराब होने का संदेह हो तो न खाएं।
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पंचांग और उपयोगी संदर्भ
Drik Panchang: Mumbai के लिए Kojagara Puja 2026, चंद्रोदय और तिथि
Drik Panchang: Mumbai में Sharad Purnima 2026
Marathi October 2026 Calendar: कोजागिरी पौर्णिमा
Author
Dinesh Rewale
Dinesh Rewale एक independent blogger और content creator हैं, जो त्योहारों, personal finance, business और रोजमर्रा के उपयोगी विषयों को आसान भाषा में समझाते हैं। उनका उद्देश्य readers को सही, सरल और काम की जानकारी देना है।
Disclaimer
यह लेख धार्मिक परंपराओं और सामान्य जानकारी के लिए है। पूजा विधि और मुहूर्त में क्षेत्रीय पंचांगों के अनुसार अंतर हो सकता है। सटीक स्थानीय समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें। भोजन की सुरक्षा और अपनी सेहत का ध्यान रखें।






